जसपाल राणा का त्रयोदशी संस्कार में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
12 जून 2026 को दिल्ली में जसपाल राणा का निधन हो गया था, जिनका आज देहरादून में त्रयोदशी संस्कार किया गया.
देहरादून। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज 24 जून को उत्तराखंड पहुंचे. यहां वे देहरादून में प्रसिद्ध निशानेबाज और पद्मश्री स्व. जसपाल राणा के त्रयोदशी संस्कार (तेरहवीं) में शामिल हुए. इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वर्गीय जसपाल राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की, साथ ही उनके परिजनों से बात कर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की. साथ ही भगवान से इस दुःख की घड़ी में परिवार को धैर्य एवं संबल प्रदान करने की कामना की.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जसपाल राणा के रिश्तेदार भी हैं. जसपाल राणा की बहन सुषमा राणा का विवाह केंद्रीय मंत्री व बीजेपी नेता राजनाथ सिंह के बेटे से हुआ है. जसपाल राणा के परिवार में उनकी पत्नी रीना राणा और दो बच्चे बेटी देवांशी और बेटा युवराज हैं. बेटी देवांशी भी शूटर हैं. देवांशी राणा ने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए 2018 ISSF जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक हासिल किया. पत्नी रीना राणा भी राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज रही हैं. पिता नारायण सिंह राणा के साथ ही दो भाई-बहन सुभाष राणा और सुषमा राणा हैं. दोनों भाई-बहन भी अच्छे निशानेबाज रहे हैं.
जसपाल राणा की त्रयोदशी संस्कार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा यूपी के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सौरव बहुगुणा, खजान दास, बीजेपी सांसद डॉ. महेश शर्मा, अजय भट्ट, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, विधायक पंकज सिंह अन्य लोगों भी शामिल हुए.
जर्मनी से लौटते समय अचानक से जसपाल राणा की तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान 12 जून को उनका निधन हो गया था. जसपाल राणा का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया था. आज जसपाल राणा का त्रयोदशी संस्कार का था, जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे थे.
जसपाल राणा (28 जून 1976 – 12 जून 2026) एक प्रमुख भारतीय निशानेबाज और कोच थे। वे भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी और कोच के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने खिलाड़ी के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते और बाद में कोचिंग में मनु भाकर जैसी नई पीढ़ी के निशानेबाजों को गाइड किया।
जसपाल राणा का प्रारंभिक जीवन
- जन्म: 28 जून 1976 को उत्तरकाशी/टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड (गढ़वाली परिवार) में हुआ।
- पिता: नारायण सिंह राणा (1971 के युद्ध के वेटरन, आईटीबीपी में सेवा, उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री)। पिता ने ही शुरुआती प्रशिक्षण दिया।
- मात्र 12 साल की उम्र में (1988) अहमदाबाद में राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने ध्यान खींचा।
जसपाल राणा की खिलाड़ी के रूप में उपलब्धियां
जसपाल राणा मुख्य रूप से 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल और स्पोर्ट्स पिस्टल में माहिर थे। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 600 से अधिक पदक जीते।
मुख्य उपलब्धियां:
- 1994: मिलान में जूनियर विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में 25m स्टैंडर्ड पिस्टल में स्वर्ण पदक + विश्व रिकॉर्ड। 18 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार मिला।
- एशियाई खेल: कुल 8 पदक (4 स्वर्ण, 2 रजत, 2 कांस्य)। 1994 हिरोशिमा में स्वर्ण, 2006 दोहा में 3 स्वर्ण (102 डिग्री बुखार के बावजूद)।
- कॉमनवेल्थ गेम्स: भारत के सबसे सफल एथलीट। 1994 से 2006 तक 4 संस्करणों में 15 पदक (9 स्वर्ण, 4 रजत, 2 कांस्य)।
- ओलंपिक: 1996 अटलांटा ओलंपिक में प्रतिनिधित्व किया।
- अन्य: 1997 में पद्म श्री (21 साल की उम्र में)। मदर टेरेसा द्वारा राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार भी मिला।
कोचिंग करियर
- 2012 से जूनियर नेशनल टीम कोच।
- द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020)।
- मनु भाकर की कोचिंग: 2024 पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
- अन्य शूटर: सौरभ चौधरी, अनीश भनवाला आदि को गाइड किया।
- 2025 में 25m पिस्टल के हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त।
उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने और सिस्टम को मजबूत करने में बड़ा योगदान दिया।
व्यक्तिगत जीवन और अन्य
- दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र।
- पत्नी: आरुषि वर्मा (या पूर्व विवाह संबंधी जानकारी में रीना राणा का उल्लेख)।
- राजनीतिक रुचि: भाजपा से जुड़े, चुनाव लड़ने की इच्छा भी व्यक्त की।
निधन
12 जून 2026 को 49 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में कार्डियक इमरजेंसी के कारण निधन हो गया। वे म्यूनिख ISSF विश्व कप से लौट रहे थे। उनकी 50वीं जन्मतिथि से कुछ दिन पहले ही यह घटना हुई।
विरासत: जसपाल राणा न केवल पदकों के लिए बल्कि भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए याद किए जाएंगे। उनका योगदान आज भी मनु भाकर जैसी सफलताओं में दिखता है।
