बदरीनाथ धाम
जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे , पारदर्शी और किसी भी प्रकार के प्रभाव से मुक्त रखने के उद्देश्य से आरोपी कर्मचारी को निलंबित किया गया.
देहरादून। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के मामले में बीकेटीसी ने वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही विभागीय जांच भी तेज कर दी गई है.
बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर भयंकर बवाल मचा हुआ है। अब इस बीच बड़ी खबर है, बहुत बड़ी खबर है।। बद्रीनाथ में हुई कथित चोरी को लेकर अब सरकार भी हरकत में आ गई है। धर्मस्व सचिव धीराज गर्ब्याल ने इस पूरे मामले पर बीकेटेसी के सीईओ महावीर रांगड़ से जवाब मांगा है. और पूरे मामले की डिटेल मांगी है। साथ ही सचिव धीराज गर्ब्याल का साफ साफ कहना है कि इस मामले पर जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी,, और गड़बड़ी पाए जाने पर, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
ईमानदार अफसरों में गिने जाने वाले धीराज गर्ब्याल ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है, और उम्मीद कीजा रही है कि अब जांच सही दिशा में आगे बढ़ेगी, और दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। हालांकि इससे पहले जब केदारनाथ मंदिर में सोना चोरी के आरोप लगे थे, तो तब गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय ने मामले की जांच की थी. हालांकि तब की जांच का क्या हुआ, जांच में क्या निकला, सोना चोरी हुआ या नहीं हुआ, ये कुछ भी सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है, लेकिन बद्रीनाथ के कथित चढ़ावा चोरी के मामल में उम्मीद की जानी चाहिए कि धीराज गर्ब्याल के दखल के बाद,, मामले की जांच गंभीरता औऱ तेज़ी से होगी।
अब इस बीच सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बद्रीनाथ मंदिर में 1 जुलाई के दिन हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, और ठीक उसके 1 दिन बाद बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने एक लेटर जारी किया था, और मंदिर में चढ़ावे गिनती को लेकर सतर्क रहने, गंभीर होने की बात लिखी थी। यानि इसी बीच मंदिर में चढ़ावा चोरी की जो आरोप लगे, वो भी इसी दौरान लगे. तो क्या नए कैमरों को किसी वजह से लगाया गया,, या फिर कोई सोची समझी साज़िश इसके पीछे थी।
हालांकि मंदिर समिति का कहना है कि पहले भी वहां कैमरे लगे थे, और एक श्रद्धालु ने हाई रिजॉल्यूशन कैमरे दान में दिए, तो 1 जुलाई को 32 हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए, तो पुराने कैमरे कहां चले गए, उनकी डीवीआर कहां चली गई, और उन कैमरों की जो रिकॉर्डिंग है, क्या वो सुरक्षित है कि नहीं।
क्योंकि अगर चढ़ावा चोरी साबित नहीं होती, तो फिर तो कोई मामला ही नहीं है, लेकिन अगर चढ़ावा चोरी का मामला साबित होता है, जांच में सही पाया जाता है, तो बहुत संभव है कि पहले भी ये काला खेल होता रहा होगा. और पुराने कैमरों में भी ये कैद हुआ होगा। बताया जा रहा है कि जांच समिति सीसीटीवी की फुटेज जांच कर रही है, औऱ मंदिर समिति का कहना है कि जांच समिति को पुरानी फुटेज भी दे दी गई है, लेकिन ये बहुत बड़ा सवाल लगातार खड़ा हो रहा है कि मंदिर में सीसीटीवी कैमरे बदलने की तारीख और कथित चढ़ावा चोरी का मामला एक साथ कैसे हो गया। क्या ये कोई संयोग है या फिर कोई प्रयोग, सवाल ये भी है।
दान अब जेब में नहीं जाएगा, लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या सिर्फ नियम बदलने से चढ़ावे पर उठते सवाल भी खत्म हो जाएंगे, अयोध्या में दान राशि को लेकर उठे विवाद के बाद अब हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में भी दान व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की निगरानी के लिए एक नई समिति का गठन किया है ताकि दान और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनाई जा सके,
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी ने बताया कि समिति में मंदिर प्रशासन के सात पुजारियों को भी शामिल किया गया है साथ ही साफ निर्देश दिए गए हैं कि मंदिर में चढ़ाए गए नारियल, फूल और प्रसाद को दोबारा नहीं चढ़ाया जाएगा… और कोई भी पुजारी चढ़ावे को अपनी जेब में नहीं रखेगा… ऐसा पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी साथ ही उन्होंने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा कि चम्पत राय को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है, उनका कहना है कि जब तक आरोप सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक किसी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए, और पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी।
हालांकि, हरिद्वार में लिए गए इस फैसले के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई व्यवस्था ज़मीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है, और क्या इससे श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत हो पाएगा, आस्था की सबसे बड़ी ताकत विश्वास है, और उस विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि व्यवस्था में भी दिखाई देनी चाहिए।
बद्रीनाथ धाम में कथित चंदा और चढ़ावा चोरी के मामले में बहुत बड़ी खबर है। अब इस पूरे मामले पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी मोर्चा खोल दिया है. और यशपाल का तो साफ कहना है कि इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से करवाई जाए, और अगर ऐसा संभव न हो तो फिर विधानसभा की समिति इस मामले की जांच करे।
यशपाल आर्य ने कह कि करोड़ों सनातनियों के आस्था का केंद्र बद्रीनाथ धाम, विवादों में है, और वहां के कर्मचारियों पर ही चढ़ावा चोरी का आरोप है। यशपाल आर्य ने कहा कि जो समिति अभी जांच कर रही है, उस पर भरोसा नहीं है। यशपाल आर्य ने कहा कि जब चढ़ावा और दान में चोरी का आरोप बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक पर ही हैं,, तो कैसे हम उनकी विभागीय जांच पर भरोसा कर सकते हैं। लिहाजा इसमें या तो हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच कराई जाए या फिर विधानसभा की समिति इसमें बनाई जाए।
यशपाल आर्य ने कहा कि पहले भी केदारनाथ धाम में सोना चोरी का आरोप लगा, उसकी भी जांच हुई, लेकिन उस जांच का क्या हुआ, क्या नतीजा निकला, किसी को नहीं पता चला, क्योंकि कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन अब बद्रीनाथ के मामले में ऐसा बिल्कुल न हो, और पूरे मामले की गंभीर जांच हो, इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यशपाल आर्य ने साथ ही कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ में अन्य गड़बड़ियों की भी तुरंत जांच कराई जाए, क्योंकि सनातनियों की आस्था और विश्वास को तोड़ने वाला, धोखा देने वाला काम किया गया है।
बद्रीनाथ मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी के कर्मचारी सिर्फ छोटी मछली हैं, बड़े मगरमच्छों को बचाया जा रहा है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि इस दौरान सवाल बीकेटीसी के सीईओ पर भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर चोरी का आरोप लगने के बाद भी संबंधित आरोपी के कमरे को सील क्यों नहीं किया गया, क्यों सबूतों से छेड़छाड़ करने दी गई। सवाल है कि क्या किसी को बचाया जा रहा है।