मॉक ड्रिल
उत्तराखंड में हर साल मानसून में आपदा आती है. उन्हीं आपदाओं के निटपने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया.
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून सीजन की शुरुआत हो गई है साथ ही राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में गुरुवार को प्रदेश के सभी 13 जिलों में राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसकी मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की.

मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़, बादल फटना, अतिवृष्टि, भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी संभावित आपदाओं की परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपदा परिचालन केंद्र से पूरी मॉक ड्रिल की मॉनिटरिंग करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

उत्तराखंड में 2 जुलाई 2026 को 13 जिलों में मानसून से संबंधित राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की गई है।
- तारीख और समय: 2 जुलाई 2026 (गुरुवार), सुबह 10 बजे से शुरू।
- क्षेत्र: पूरे राज्य के 13 जिलों में लगभग 66 से 70 स्थानों पर (कुछ रिपोर्टों में 67 या 70 उल्लेख)। लगभग 95% नए स्थानों पर यह पहली बार हो रहा है, ताकि व्यापक तैयारी का परीक्षण हो सके।
- उद्देश्य: मानसून सीजन में संभावित आपदाओं (भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, आदि) से निपटने की तैयारियों का जमीनी परीक्षण। विभागों के बीच समन्वय मजबूत करना, संसाधनों की उपलब्धता जांचना, राहत-बचाव की क्षमता परखना और कमियों को पहचानना।
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा आयोजित।
- सीएम स्वयं मॉक ड्रिल का निरीक्षण करेंगे और आधुनिक आपदा प्रतिक्रिया उपकरणों की प्रदर्शनी देखेंगे।
- इससे पहले 30 जून या 1 जुलाई को टेबल टॉप एक्सरसाइज (सिमुलेशन बैठक) आयोजित की गई, जिसमें सभी जिलों के अधिकारियों ने भाग लिया।

मॉक ड्रिल में शामिल एजेंसियां:
- SDRF, NDRF, पुलिस, फायर सर्विस, होम गार्ड, सिविल डिफेंस, NCC, NSS, पूर्व सैनिक, आपदा मित्र, NGO, रेड क्रॉस आदि।
- सिमुलेटेड परिदृश्य: भूस्खलन, बाढ़, जलभराव, हेली रेस्क्यू, राहत सामग्री वितरण, मानव-वन्यजीव संघर्ष आदि।
- राहत शिविरों का परीक्षण: बिजली, पानी, भोजन, चिकित्सा, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्थाएं।
- CBRNE (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, विस्फोटक) उपकरणों का प्रदर्शन।

इन जिलों में हुई मॉक ड्रिल:
- रुद्रप्रयाग: मदमहेश्वर, कुंड, छेनागाड़, केदारनाथ पैदल मार्ग, नरकोटा आदि।
- अल्मोड़ा: 6 स्थानों पर।
- अन्य जिलों (देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, चमोली आदि) में भी कई-कई स्थानों पर अभ्यास।
मॉक ड्रिल महत्व:
यह अभ्यास पिछले अनुभवों (जैसे बादल फटना, भूस्खलन) को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इसका लक्ष्य वास्तविक आपदा में जान-माल की हानि कम करना और तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। USDMA के ‘Sachet’ और ‘Bhudev’ ऐप्स का प्रचार भी किया गया है।