नेपाल के रसुवा जिले में बाढ़ के बाद तबाही की तस्वीर
भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ से नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिले में सबसे ज्यादा तबाही हुई. एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी हुए तबाह.
देहरादून। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में बुधवार को आई भयानक बाढ़ में अब तक 95 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. इस आपदा के बाद 105 भारतीय और 37 NRI समेत करीब 400 – 500 लोग लापता हैं. इस बाढ़ की वजह से कई गांव बह गए. घरों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. यह क्षेत्र तिब्बत की सीमा से लगा है. लापता बताए जा रहे ज्यादातार भारतीय तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे.
नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का मुख्य कारण तिब्बत (चीन) क्षेत्र में आए एक हल्के भूकंप के बाद हुआ हिमस्खलन (Ice-Rock Avalanche/Glacier Collapse) माना जा रहा है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस हिमस्खलन के मलबे ने ल्हेंदे नदी (Lhende Khola) के बहाव को अस्थायी रूप से रोक दिया था, जिससे वहां एक प्राकृतिक बांध बन गया। जब पानी का दबाव बढ़ा, तो यह रुकावट अचानक टूट गई और भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदियों में 8 से 10 मीटर ऊंची विनाशकारी बाढ़ की लहरें नीचे की ओर तेजी से बढ़ीं। इसके अतिरिक्त, तिब्बती पठार क्षेत्र में भारी बारिश और ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की आशंका भी जताई गई है।

भयानक बाढ़ से तिब्बत बॉर्डर से लगे नेपाल के दो जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. नदी के किनारे बसी बस्तियों में भारी तबाही हुई हैं और एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा. भोटेकोशी नदी बेसिन में स्थित लगभग 8 से 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे नेपाल की करीब 354 से 430 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई है। ‘लांगटांग खोला हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट’ की सुरंग में काम कर रहे करीब 60 कर्मचारी भी लापता हैं।

अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ बुधवार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी नदी में आई और इसने तिब्बत बॉर्डर से लगे रसुवा और धाडिंग जिलों और काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में नुवाकोट जिले को प्रभावित किया. नेपाल-चीन व्यापार की लाइफलाइन माना जाने वाला ‘मितेरी पुल’ (Friendship Bridge) और पासांग ल्हामु हाईवे का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ में पूरी तरह बह गया है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत से नेपाल की तरफ बहने वाली भोटेकोशी नदी में गिरी बर्फ के पिघलने के कारण यह बाढ़ आई. त्रिशूली नदी में भी बाढ़ आ गई है. जिसके बाद अधिकारियों ने नदी के निचले इलाकों में स्थित जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है. अधिकारियों ने रसुवा जिले में बाढ़ से भारी तबाही की आशंका जताई है.

नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) ने एक बयान में कहा कि रसुवा में बाढ़ की वजह से कुल 384 यात्री लापता हो गए हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं. इन यात्रियों में 105 भारतीय पर्यटक, 37 एनआरआई और बाकी अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स के पर्यटक शामिल हैं.
सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी ने बताया कि लापता हुए भारतीयों में से कम से कम 59 कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्री थे.
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं. दूतावास ने एक्स पोस्ट में कहा कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं.
इसी प्रकार, नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी पीड़ितों की मदद के लिए टोल फ्री इमरजेंसी नंबर 1234 या हॉटलाइन 1144 या टूरिस्ट पुलिस 9851289445 जारी किए हैं.

राहत सामग्री भेज रहा भारत
भारत ने आपदा के बीच अपने पड़ोसी देश नेपाल की मदद के हाथ बढ़ाया है और भारतीय वायु सेना के विमान से नेपाल को राहत सामग्री भेज रहा है. नई दिल्ली में अधिकारियों ने कहा कि सरकार की मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) पहल के तहत, दवाओं और राशन सहित इमरजेंसी मदद की एक खेप पड़ोसी देश को भेजी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू करने के लिए NDRF के बचाव दल भेजने की भी योजना बना रही है.

भारत में नेपाली दूतावास ने एक बयान में कहा कि नेपाल में आई भयंकर बाढ़ से कई लोगों की जान चली गई, कई लोग लापता हो गए और प्रभावित इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों, हाइड्रोपावर सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां, आपदा प्रबंधन अथॉरिटी, स्थानीय प्रशासन, हेल्थ सर्विस और अन्य संबंधित संस्थाएं पूरी तरह से तैयार हैं. हर उपाय से सर्च और रेस्क्यू, लोगों को निकालने, इमरजेंसी मेडिकल मदद और राहत के काम किए जा रहे हैं. अधिकारी नदी प्रणाली और निचले इलाकों में और बाढ़ के खतरे पर भी करीब से नजर रख रहे हैं.
नेपाली दूतावास ने कहा कि चूंकी हालात अभी भी साफ नहीं हैं, इसलिए हताहतों, लापता लोगों और नुकसान की पूरी जानकारी की अभी भी जांच की जा रही है. आपदा के कारण का भी पता लगाया जा रहा है.