उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्र लीक
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्र लीक, 372 विद्यार्थियों पर पड़ा इसका सीधा इसका असर. जिसके बाद छात्रों को दोबारा देनी होगी परीक्षा
देहरादून। देश भर और उत्तराखंड में NEET पेपर लीक मामले में बवाल के बीच उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से पेपर लीक को लेकर एक ऐसी खबर सामने आ रही है. जिसने हर किसी को चौंका दिया है. यहां पेपर लीक की ऐसी हद हो गई कि एग्जाम होने से पहले ही छात्रों के वॉट्सऐप तक पहुंच गया और सीधा 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के कई सौं बेकसूर छात्रों का भविष्य बर्बाद कर गया. महीनों की मेहनत पर पानी फेर गया. और अब 12 “इंजीनियरिंग कॉलेजों” के हजारों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी.
और हैरानी की बात तो ये है कि पेपर लीक करने वाला कोई माफिया, गैंगस्टर या जालसाज, या दलाल नहीं है. बल्कि कॉलेज का ही एक टीचर है. जिसे छात्र अपना गुरु और मार्गदर्शक मानते हैं.

उत्तराखंड की एक बड़ी यूनिवर्सिटी वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (UTU) का है. यहां एग्जाम से पहले 2 सब्जेक्ट्स के क्वेश्चन पेपर लीक हो गये. जिसके बाद एक दो नहीं सीधा- सीधा 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के कई सौं बेकसूर छात्रों को, महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया. और हजारों छात्रों को फिर से परीक्षा के तनाव से गुज़ारना पड़ेगा.
वहीं जांच के बाद यूनिवर्सिटी ने दो सब्जेक्ट्स की परीक्षाएं कैंसिल कर दी हैं. आरोप है कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले ही ‘मशीन लर्निंग’ और ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ सब्जेक्ट्स के 2 पेपर वॉट्सऐप पर लीक कर दिए.
पूरा मामला सत्र 2025-26 के इंजीनियरिंग छात्रों के इवन-सेमेस्टर (Even-Semester) परीक्षाओं का है. जहां हाल में 2 IMPORATENT विषयों( subjects) ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ और दूसरा ‘इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ का पेपर आयोजित होना था. कई सौं छात्र इसके लिए महीनों से तैयारी भी कर रहे थे. लेकिन इससे पहले एग्जाम हो पाता, शिवालिक कॉलेज के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने इन्हें पहले ही छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप पर इसे शेयर कर दिया. जब इस बात की शिकायत यूनिवर्सिटी प्रशासन को मिली तो एक्शन लिया गया.
वहीं गड़बड़ी मिलते ही यूनिवर्सिटी ने बिना देर किए दोनों परीक्षाओं को तुरंत रद्द कर दिया है. और आरोपी प्रोफेसर को और आरोपी प्रोफेसर को तुरंत 7 साल के लिए सस्पेंड कर दिया. साथ ही ‘मशीन लर्निंग’ और ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ की दो परीक्षाएं तुरंत रद्द कर दी गई हैं.
दोनों निरस्त की गईं परीक्षाएं इसी अगस्त के तीसरे हफ्ते में दोबारा आयोजित कराई जाएंगी.
एग्जाम रद्द हो गए टीचर भी संस्पेंड हो गया लेकिन इसका सबसे बड़ा खामियाजा UTU से संबद्ध 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के कई सौं बेकसूर छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. छात्रों की महीनों की मेहनत पर एक झटके में पानी फिर गया. और सबसे बड़ी बात अब छात्राओं को अगस्त के तीसरे हफ्ते में दोबारा परीक्षा देनी होगी. दोबारा मेहनत करनी होगी. फिर से उसी तनाव से गुज़ारना पड़ेगा।
UTU कुलपति तृप्ता ठाकुर ने बताया कि – हमारे पास 8 जुलाई को एक पेपर हुआ था। आयोग टीके का जो कि शिवालिक कॉलेज का एक इलेक्टिव पेपर है तो उसके बारे में हमें खबर आई। एक शिकायत आई कि ये पेपर लीक हुआ है तो हमने अपनी इंटरनल कमेटी बनाई। तुरंत जांच करी। इसकी गंभीरता को समझा और जांच कमेटी ने हमारे सामने रखा कि हां इसमें पेपर लीक हुआ है तो हमने उसमें एक्शन लेते हुए वो 22 बच्चों का पेपर निरस्त कर दिया। लेकिन हमारी जांच कमेटी ने यह पाया कि इस टीचर ने पेपर यूनिवर्सिटी में बनाया था और उसकी भी जांच करे तो वो हमें जब पता चला कि इस टीचर ने वो एक और पेपर बनाया है, जिसमें करीबन 355 बच्चे हैं तो हमने प्रिकॉशन लेते हुए कि अगर टीचर की इंटीग्रिटी डाउटफुल है तो हम ये चांस नहीं ले सकते। उसकी शिकायत है कि हमारे पास इस पेपर के लेकिन प्रकाश पूरी न होने पर भी निरस्त कर दिया और वो पेपर भी हम दोबारा करा रहें है।

एक ओर जहां देश और छात्र पहले ही परीक्षाओं में धांधली से गुस्से में हैं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं, ऐसे में राज्य की राजधानी और शिक्षा नगरी कही जाने वाली देहरादून और सबसे बड़ी यूनिवर्सिटियों में से एक उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) में एग्जाम से पहले ही इस प्रकार पेपर लीक की लापरवाही बड़े सवाल पैदा करती है.
इस मामले में न सिर्फ यूनिवर्सिटी प्रबधंन को बल्कि सरकार को भी सोचना चाहिए. और आप और हमें भी सोचना चाहिए कि आखिरकब तक छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा? कब तक सैकड़ों छात्र पेपर लीक के कारण सुसाइड करते रहेंगे?