लोकसभा में संशोधन बिल
नई दिल्ली: आज 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन बिल) पर वोटिंग हुई और यह गिर गया।
मुख्य खबर
- संसद के विशेष सत्र (16-17 अप्रैल) के दूसरे दिन लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के बाद वोटिंग हुई।
- कुल 528 सांसदों ने वोट डाले।
- पक्ष में: 298 वोट
- विपक्ष में: 230 वोट
- संविधान संशोधन बिल के लिए दो-तिहाई बहुमत (लगभग 352 वोट, अगर पूर्ण सदन मानें तो) जरूरी था, जो नहीं मिला। इसलिए बिल नेगेटिव (गिर गया)।
इसके साथ ही सरकार ने परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को भी वापस ले लिया।
बिल का उद्देश्य क्या था?
यह बिल मुख्य रूप से महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) को प्रभावी बनाने के लिए लाया गया था:
- लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव (राज्यों में 815 + केंद्र शासित प्रदेशों में 35)।
- परिसीमन (delimitation) के आधार पर नई सीटें तय करने और महिलाओं को 33% आरक्षण तुरंत या 2029 चुनावों से लागू करने का प्रावधान।
- इससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य था।
सरकार का कहना था कि इससे महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जा सकेगा, लेकिन विपक्ष ने जनगणना, OBC/मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटा, और परिसीमन के समय पर सवाल उठाए।
क्या हुआ था कल (16 अप्रैल)?
- बिल को पेश करने के लिए वोटिंग हुई → पक्ष में 251, विरोध में 185 (बिल पेश हो गया)।
- आज पूर्ण चर्चा और अंतिम वोटिंग हुई, जिसमें बिल गिर गया।
प्रतिक्रियाएं
- सरकार: बिल गिरने के बावजूद महिला आरक्षण पर अड़े रहने का संकेत दिया। अमित शाह आदि ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया।
- विपक्ष: राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी आदि ने बिल को “धोखा” बताया और जनगणना की मांग की। कुछ सदस्यों ने SC/ST/OBC महिलाओं के लिए सब-कोटा की मांग रखी।
यह एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है क्योंकि 2023 का मूल महिला आरक्षण कानून अभी लागू नहीं हुआ था (परिसीमन के बाद) और अब यह संशोधन भी लोकसभा में फेल हो गया।
