गैरसैंण विधानसभा
गैरसैंण। उत्तराखंड की गर्मियों की राजधानी भराड़ीसैंण में बुधवार को दो दिवसीय विधानसभा सत्र को अनिश्चितकाल के लिए खत्म कर दिया गया। सत्र समाप्त होने के बाद, संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मीडिया से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सदन की गतिविधियों, विपक्ष के विरोध, अनुपूरक बजट और पारित किए गए विधेयकों के संबंध में सरकार का पक्ष प्रस्तुत किया। सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार ने आवश्यक वित्तीय और विधायी कार्य पूरा करते हुए अनुपूरक बजट के साथ राज्य के हित में 9 अन्य विधेयकों को पारित कराया। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि हंगामे के कारण महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा नहीं हो पाई। उनके अनुसार, सदन में बजट और विधेयकों पर चर्चा के साथ विपक्ष को भी अपनी बातें रखने का मौका मिलना चाहिए था, लेकिन कार्यवाही सही तरीके से नहीं चल पाई।

अनुपूरक बजट और 9 विधेयक हुए पास: सुबोध उनियाल ने बताया कि सत्र के दूसरे दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा और मतदान होना था। इसके साथ ही 9 अन्य विधेयकों पर भी सदन में चर्चा और उन्हें पारित करने की योजना थी। इस प्रकार, अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक सहित कुल 10 विधेयक सदन की कार्यवाही का हिस्सा थे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी व्यवधानों के बावजूद अनुपूरक बजट और 9 अन्य विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कराया। इन विधेयकों में वित्तीय प्रबंधन, जीएसटी और राज्य के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित प्रस्ताव शामिल थे।
विपक्ष पर हंगामा करने का आरोप – विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने बजट और विधेयकों पर सार्थक चर्चा करने के बजाय हंगामा करना प्राथमिकता समझा। उनियाल ने कहा कि सदन में प्रश्नकाल, नियम 58 के तहत सूचनाओं और नियम 310 के तहत उठाए जाने वाले विषयों पर भी चर्चा होनी थी। लेकिन कार्यवाही में रुकावट आने की वजह से कई मुद्दों पर चर्चा का अवसर नहीं मिल सका।

मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि – यदि सदन सामान्य रूप से संचालित होता, तो विधायक अपनी आंतरिक बातें साझा करते, सरकार उत्तर देती, और विभिन्न मुद्दों पर उपयोगी सुझाव भी आते। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में चर्चा का मुख्य उद्देश्य केवल विधेयकों को पास कराना नहीं है, बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित करना भी है। सुबोध उनियाल ने विपक्ष के रवैये को उसकी असफलता के रूप में देखा।

राज्यहित से जुड़े विधेयकों पर चर्चा नहीं होने का दु:ख: सुबोध उनियाल ने बताया कि अनुपूरक बजट और अन्य विधेयक राज्य के लिए अहम थे। इनमें बजट प्रबंधन और जीएसटी के संबंध में बदलाव भी शामिल थे। उनके अनुसार, यदि इन विषयों पर बातचीत होती, तो विधायकों को अपने विचार रखने का अवसर मिलता और सरकार भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती थी।
उन्होंने बताया कि विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने और नीतियों पर चर्चा करने का पूरा मौका मिलना चाहिए, लेकिन इसके लिए सदन का सुचारु रूप से चलना आवश्यक है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि हंगामे के कारण राज्यहित से संबंधित प्रस्तावों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई। फिर भी, सरकार ने विधायी कार्यों को पूरा करते हुए बजट और विधेयकों को मंजूरी देने का उल्लेख किया।
सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया: दो दिवसीय विधानसभा सत्र के अंत में, सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री ने सभी कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया और विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

