उत्तराखंड का सैन्य धाम
कथित भ्रष्टाचार के विवादों में घिरते देहरादून सैन्य धाम का लोकार्पण फिर से टला. चर्चा थी कि पीएम 9 नवंबर को लोकार्पण कर सकते हैं.
देहरादून। उत्तराखंड सैन्य धाम का लोकार्पण पीएम मोदी के उत्तराखंड दौरे के बाद भी टल गया. पिछले दो सालों में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी कई बार सैन्य धाम के लोकार्पण का दावा कर चुके हैं. लेकिन हर बार दावा खोखला साबित होता है. ऐसे में मंत्री जोशी के दावों पर कांग्रेस ने तंज कसना शुरू कर दिया है.

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा था कि बिहार चुनाव के मद्देनजर पीएम मोदी उत्तराखंड नहीं आए तो लोकार्पण टल सकता है. लेकिन पीएम मोदी के उत्तराखंड पहुंचने के बाद भी सैन्य धाम का लोकार्पण नहीं हो सका. ऐसे में अब गणेश जोशी ने लोकार्पण न करने का अलग कारण बताया है.
सैन्य धाम निर्माण में अनियमितता को लेकर PMO में शिकायत कई शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंची. ये शिकायतें अधिवक्ता विकेश नेगी और पूर्व सैनिक मधुकांत ध्यानी ने पत्र लिखकर सैन्य धाम निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर की थी.

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी का कहना है कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी हर 6 महीने में सैन्य धाम के लोकार्पण का दावा करते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से स्पष्ट तौर पर सैन्य धाम का लोकार्पण न किए जाने को लेकर पत्र भेजा जाता है.
वहीं, वर्तमान में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने मामले पर दो टूक कहा कि, ‘कयासबाजी केवल कयासबाजी होती है और हकीकत, हकीकत होती है’. उनके इस बयान से उन्होंने साफ तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन बातों ही बातों में उन्होंने दावों को कयासबाजी करार दिया.

शिकायतकर्ता विकेश नेगी ने बताया कि उनके द्वारा पीएम कार्यालय को की गई शिकायत में नवनिर्मित सैन्य धाम के निर्माण में कई अनियमिताओं का जिक्र किया गया है. साथ ही पीएमओ को इस बारे में गुमराह किया गया है. पीएम मोदी के दौरे से पहले पीएमओ को लिखे खत में विकेश नेगी ने कहा था कि, जिस सैन्य धाम के उद्घाटन के लिए आप आ रहे हैं वो पूरी तरह से भ्रष्टाचार के तहत नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया है. इस संबंध में काफी विवाद लंबे समय से चले आ रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि कार्यदायी संस्था और कार्यदायी विभाग, पीएमओ को अंधेरे में रख रहा है.

विभाग ने खारिज किए आरोप: सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारी दीपेंद्र चौधरी का कहना था कि विकेश नेगी और उनके विभागीय मंत्री का पहले से ही आपस में विवाद चलता आ रहा है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर सैन्य धाम निर्माण को लेकर लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया. 31 अक्टूबर को दिए बयान में सीएम धामी ने भ्रष्टाचार या गड़बड़ी की संभावना से इनकार किया था. साथ ही कहा था कि निर्माण में सभी प्रक्रिया विधि संवत और व्यवस्था के तहत हुई हैं. अगर किसी के पास भ्रष्टाचार या गड़बड़ी के कोई सबूत हैं तो सरकार कार्रवाई करेगी.

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कई बार बयान देकर सरकार को घेरने की कोशिश कर चुके हैं. 31 अक्टूबर को देहरादून में मीडिया को दिए बयान में हरीश रावत ने कहा था कि, जहां पर बलिदान और शौर्य गाथाओं का प्रतीक सैन्य धाम बनाया गया है उसी सैन्य धाम निर्माण की नींव भ्रष्टाचार पर रखी गई है. उन्होंने भूमि को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि खेत और नाले को घेर कर सैन्य धाम का निर्माण किया गया. इस तरह के विवाद इसकी गरिमा के लिए बेहद निंदनीय है.

उत्तराखंड का सैन्य धाम के बारे में जानकारी
उत्तराखंड का सैन्य धाम (Sainya Dham) राज्य के सैनिकों और शहीदों को समर्पित एक भव्य स्मारक और सैन्य तीर्थस्थल है। यह राज्य की गौरवशाली सैन्य परंपरा को सम्मान देने का प्रतीक है, जहां भारतीय सेना में उत्तराखंड का योगदान सबसे अधिक है। इसे उत्तराखंड के ‘चतुर्थ धाम’ (चार धाम) के बाद ‘पांचवां धाम’ कहा जा रहा है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले घोषित की गई थी। आइए, इसकी पूरी डिटेल्स विस्तार से जानते हैं।
स्थान और आकार
- स्थान: देहरादून जिले के गुणियाल गांव (पुर्कुल क्षेत्र) में, शहर के बाहरी इलाके में स्थित। यह सरकारी भूमि (सैनिक कल्याण विभाग) पर बना है, जो जंगल विभाग की जमीन नहीं है।
- आकार: लगभग 4 हेक्टेयर (50 बीघा) क्षेत्र में फैला हुआ।
निर्माण इतिहास
- घोषणा: 2019 में पीएम मोदी द्वारा उत्तराखंड यात्रा के दौरान घोषित।
- शिलान्यास: 15 दिसंबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा शिलान्यास किया गया।
- निरीक्षण: अगस्त 2022 में राज्यपाल द्वारा निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया।
- विवाद और कोर्ट मामला: 2024 में हाईकोर्ट ने निर्माण पर रोक लगा दी, क्योंकि इसे निजी भूमि पर बनने का आरोप लगा। कोर्ट ने कहा कि साइट तक पहुंचने वाली सड़क निजी संपत्ति से गुजर रही थी बिना मुआवजे के। हालांकि, अगस्त 2024 में कोर्ट ने रोक हटा दी, जब राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सरकारी भूमि है और नो-कंस्ट्रक्शन जोन में कोई निर्माण नहीं होगा। याचिकाकर्ता सीमा कनोजिया ने अपनी याचिका वापस ले ली।
- विवाद (2025): उद्घाटन से पहले अक्टूबर 2025 में निर्माण में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे। अधिवक्ता विकास नेगी ने पीएमओ और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट और काम आवंटन की जानकारी साझा की, दावा किया कि जमीन जंगल विभाग की है। सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने इनकार किया।
- समापन: अक्टूबर 2025 तक निर्माण पूरा हो चुका।
लागत
- कुल लागत: 91.26 करोड़ रुपये। सैनिक कल्याण विभाग कार्यान्वयन एजेंसी है।
विशेषताएं और सुविधाएं
सैन्य धाम में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ सैन्य इतिहास को जीवंत करने वाली कई आधुनिक सुविधाएं हैं। मुख्य आकर्षण:
- शहीद स्मारक: 1,734 उत्तराखंडी शहीदों के नाम अंकित। निर्माण में इनके घरों से मिट्टी और 13 जिलों की 28 नदियों का जल समाहित किया गया।
- अमर जवान ज्योति: केंद्र में एक मुख्य स्तंभ, जो अमर जवान ज्योति का प्रतीक है।
- मुख्य द्वार: भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के नाम पर।
- मंदिर:
- बाबा हरभजन सिंह (सेना में लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं) को समर्पित।
- बाबा जसवंत सिंह (1965 युद्ध से जुड़े सैन्य अधिकारी) को समर्पित।
- म्यूजियम-ऑडिटोरियम: सैन्य उपकरणों (टैंक, नौसेना मॉडल) की प्रदर्शनी, लाइट एंड साउंड शो।
- राष्ट्रीय ध्वज: 120 फुट ऊंचा तिरंगा।
- अन्य: ओपन-एयर थिएटर, सैन्य इतिहास प्रदर्शनी।
महत्व
- सैन्य योगदान: उत्तराखंड भारतीय सेना में सबसे अधिक सैनिक देने वाला राज्य है। देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) स्थित होने से इसका विशेष महत्व।
- सांस्कृतिक और भावनात्मक: शहीद परिवारों और जनता के लिए भावुक केंद्र। राष्ट्रवाद, बलिदान और कर्तव्य की भावना को मजबूत करता है। भाजपा की सैन्य गौरव और राष्ट्रीय सुरक्षा की राजनीतिक कथा का हिस्सा।
- पर्यटन: धार्मिक-सैन्य तीर्थ के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देगा।
उद्घाटन
- तिथि: 9 नवंबर 2025 को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित था। यह उत्तराखंड के गठन दिवस (सिल्वर जुबली) समारोह का हिस्सा था. जोकि नहीं हुआ.
