अर्बन कोऑपरेटिव बैंक खाता धारक बाहर
RBI ने अर्बन को ऑपरेटिव बैंक पर 6 महीने के लिए सभी वित्तीय लेनदेन पर लगाई रोक
देहरादून। 10 फरवरी 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक ने अर्बन को ऑपरेटिव बैंक पर 6 महीने के लिए सभी वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी है.
RBI ने ये रोक बैंक में सुपरवाइजरी चिंताएं (supervisory concerns) और हाल की कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं/विकास (material developments) सामने आने पर लगाई हैं।
RBI ने पाया कि बैंक की वर्तमान लिक्विडिटी स्थिति (liquidity position) कमजोर है, जिससे जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।
बैंक में वित्तीय अनियमितताओं या गड़बड़ियों की भीआशंका है, जिसके चलते RBI ने Banking Regulation Act, 1949 की धारा 35A और 56 के तहत Directions जारी किए हैं।
RBI ने स्पष्ट किया कि यह रोक जमाकर्ताओं (depositors) के हितों की रक्षा के लिए है, न कि बैंक का लाइसेंस रद्द करने के लिए। DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के तहत 5 लाख रुपये तक की जमा राशि सुरक्षित है (बीमा कवर मिल सकता है, वेरिफिकेशन के बाद)।
इससे बैंक में लगभग 9 हजार खाता धारकों के करोड़ों रुपए फंस गए हैं. जिसके बाद खाता धारकों को अपनी मेहनत की कमाई की चिंता सताने लग गई है. वहीं, बैंक की ओर से इस मामले को लेकर प्रतिक्रयी भी सामने आई है.
बुधवार को जब खाता धारक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पहुंचे उन्हें पता चला तो वो बहुत निराश हुए, खाता धारकों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन भर की पूंजी को उन्होंने एफडीआई के रूप में बैंक में जमा कराए थे. कई लोगों ने करंट अकाउंट और सेविंग खाते भी खोले थे. और आरबीआई ने किसी भी प्रकार के खाते, चालू आवर्ती या सावधी जमा से रकम निकालने की रोक लगा दी है. इससे व्यापारी वर्ग का सारा कार्य रुक गया है. व्यापारी किसी भी प्रकार का देनदारों लेनदेन नहीं कर पा रहे है. बैंक में प्रतिबंध लगने से उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न हो गई है.
रोक के प्रमुख प्रावधान:
- बैंक नए ऋण देने, निवेश करने, नई जमा स्वीकार करने, उधार लेने या संपत्ति बेचने आदि किसी भी लेनदेन के लिए RBI की पूर्व अनुमति जरूरी है।
- बचत, चालू या अन्य खातों से निकासी पूरी तरह प्रतिबंधित है (कोई राशि नहीं निकाली जा सकती)।
- यह रोक 6 महीने तक रहेगी और RBI द्वारा समीक्षा के अधीन है।
वहीं अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष मयंक ममगाईं ने बताया , ये मामला साल 2013 और साल 2014 की कुछ अनियमिताओं से जुड़ा हुआ है. फिलहाल आरबीआई की तरफ से जो रोक लगाई गई है वो अस्थायी है, किसी भी उपभोक्ता को परेशान होने की जरूरत नहीं है. बैंक को जैसे ही नई गाइडलाइन मिलेगी बैंक की ओर से लेनदेन शुरू कर दिया जाएगा.
