उत्तराखंड में साल 2025 में आपदाएं
देहरादून। साल 2025 उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं साल रहा (मुख्य रूप से बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना और फ्लैश फ्लड जैसी आपदाओं) से काफी भारी नुकसान हुआ। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा तैयार पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट के अनुसार, जो राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को सौंपी गई, उत्तराखंड में पूरे साल की आपदाओं से राज्य पर कुल ₹15,103.5 करोड़ का आर्थिक प्रभाव पड़ा।
मुख्य आंकड़े (PDNA रिपोर्ट से):
- प्रत्यक्ष क्षति (Direct Damages): ₹3,792.4 करोड़
- आर्थिक नुकसान (Economic Losses): ₹312.2 करोड़
- पुनर्वास, पुनर्निर्माण और रिकवरी की आवश्यकता: ₹10,999 करोड़ (सबसे बड़ा हिस्सा, “Build Back Better” के तहत)
उत्तराखंड में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र:
- इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर — सबसे अधिक नुकसान (₹6,225.7 करोड़ तक का प्रभाव)
- सोशल सेक्टर (घर, स्वास्थ्य, शिक्षा) — ₹4,966.9 करोड़
- हेल्थ सेक्टर — ₹2,579.5 करोड़
- हाउसिंग — ₹2,005.5 करोड़
- वाटर सप्लाई — सबसे ज्यादा प्रभावित (₹4,048.9 करोड़ तक)
जान-माल का नुकसान (मृत्यु और अन्य):
2025 में विभिन्न आपदाओं (जुलाई-अगस्त-सितंबर में मुख्य रूप से मानसून के दौरान) से कुल मौतों की संख्या विभिन्न स्रोतों के अनुसार 200 से 500+ के बीच बताई गई है। प्रमुख घटनाओं में:
- उत्तरकाशी जिला — सबसे अधिक प्रभावित रहा।
- मौतें: सर्वाधिक 29 मौतें दर्ज (कुल प्राकृतिक आपदा मौतों का ~20%)।
- लापता: 67 लोग।
- प्रमुख घटना: 5 अगस्त 2025 को धाराली (Dharali) और हरसिल में क्लाउडबर्स्ट से फ्लैश फ्लड, जिसमें 70+ मौतें/लापता (आरंभिक रिपोर्ट 5 मौतें, बाद में 70+ तक अनुमान), 40-50 घर/होटल नष्ट, बाजार बह गया। यह जिले में सबसे बड़ी आपदा थी।
- अन्य जिलों में उल्लेखनीय प्रभाव (मुख्यतः मानसून सीजन में):
- देहरादून: सितंबर 2025 में भारी बारिश/क्लाउडबर्स्ट से 13+ मौतें, 16 लापता, कई पुल/मंदिर क्षेत्र प्रभावित।
- नैनीताल, टिहरी, चमोली: सड़क हादसों और आपदाओं में मौतें अधिक (लेकिन प्राकृतिक आपदा में कम विस्तृत आंकड़े)। नैनीताल में सड़क हादसों से 27 मौतें (कुल आपदा नहीं)।
- चमोली, रुद्रप्रयाग आदि में भी भूस्खलन/बाढ़ से मौतें और नुकसान, लेकिन सटीक जिला-वार संख्या सीमित।
- 5 अगस्त 2025 को धराली (उत्तरकाशी) फ्लैश फ्लड/क्लाउडबर्स्ट — कम से कम 5-6 पुष्ट मौतें, 50-100+ लोग लापता (कई रिपोर्टों में 70 तक मृत मानकर चलें), दर्जनों घर-होटल बह गए।
- जुलाई की बाढ़ और भूस्खलन (जोशीमठ, चमोली, रुद्रप्रयाग आदि) — 300+ मौतें और 15,000+ लोग विस्थापित।
- अन्य घटनाएं (सितंबर में देहरादून आदि) — अतिरिक्त 13+ मौतें और लापता।
कुल मिलाकर, मौतों की संख्या 300-500+ के आसपास अनुमानित है (विभिन्न रिपोर्टों में भिन्नता है, लेकिन PDNA रिपोर्ट मुख्य रूप से आर्थिक फोकस वाली है)। हजारों घर, सड़कें, पुल, अस्पताल और होटल क्षतिग्रस्त हुए।
यह साल उत्तराखंड के लिए बहुत विनाशकारी रहा, खासकर मानसून सीजन में। रिपोर्ट “Build Back Better” पर जोर देती है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बेहतर सुरक्षा हो सके।
