चमोली THDC टनल
टीएचडीसी की पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल में ट्रॉलियों से मजदूर टनल में काम करने जा रहे थे, अंदर से आ रही ट्रॉली से हुई टक्कर
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) की देर रात एक बड़ा हादसा हुआ। यह हादसा THDC (Tehri Hydro Development Corporation) की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टनल में हुआ।

परियोजना: विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना (444 मेगावाट क्षमता वाली) अलकनंदा नदी पर बन रही। यह पीपलकोटी टनल का लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी हिस्सा है जहां हादसा हुआ, यह हादसा रात लगभग 8:30 से 9:30 बजे के बीच, शिफ्ट बदलते समय। जब टनल के अंदर मजदूरों, अधिकारियों और सामग्री ले जाने वाली दो लोको ट्रेनें (इंटरनल ट्रांसपोर्ट ट्रेनें, सिंगल ट्रैक पर चलने वाली) आपस में टकरा गईं। एक ट्रेन में मजदूर सवार थे, दूसरी सामग्री ले जा रही थी या खड़ी थी। टक्कर जोरदार थी, जिससे दो कोच पटरी से उतर गए और टनल में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी या सिग्नलिंग की गलती का अनुमान लगाया जा रहा है। यह टक्कर टनल अंधेरे हिस्से में हुई। ये ट्रेनें इंडियन रेलवे की नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट की लोकल व्यवस्था की हैं।

हादसे के समय वह लगभग 109 लोग (ज्यादातर मजदूर)थे। विभिन्न रिपोर्ट्स में 60 से 70 के बीच घायल हुए है। कुछ मेंमज़दूरों को फ्रैक्चर सहित चोटें।
अभी तक राहत की बात ये है कि हादसे में किसी की मौत की नहीं मिली, हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और प्रोजेक्ट टीम ने रेस्क्यू शुरू किया। सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

घायलों का इलाज गोपेश्वर जिला अस्पताल में 42 के करीब भर्ती (कुछ फ्रैक्चर वाले)। पीपलकोटी के विवेकानंद अस्पताल में 17 के करीब लोगों को भर्ती कराया गया है। कई को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। सभी घायलों की स्थिति स्थिर है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारी से संपर्क कर बेहतर इलाज के निर्देश दिए और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

यह परियोजना अगले साल पूरी होने वाली है, जिसमें टनल बोरिंग मशीन (TBM) से खुदाई चल रही है। हादसे के बाद टनल में काम अस्थायी रूप से रोका गया। जांच चल रही है, सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल उठे हैं। मजदूर ज्यादातर झारखंड और ओडिशा के हैं, उनके परिवारों को सूचना दी गई।
यह हादसा 2021 के तपोवन-विष्णुगाड प्रोजेक्ट ग्लेशियर बर्स्ट से अलग है। वर्तमान जानकारी के अनुसार कोई नई मौत या बड़ा संकट नहीं है, सभी घायल सुरक्षित हैं।
