देहरादून। भारत में आगामी जनगणना 2027 (जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले चरणों में प्रस्तावित है इसके लिए सरकार ने सख्त नियम जारी किए हैं। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत, नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को 3 साल तक की जेल और/या ₹1,000 का जुर्माना किया जा सकता है।
रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा जारी इन निर्देशों के अनुसार, अधिकारियों के लिए निम्नलिखित कार्यों को दंडनीय अपराध माना गया है:
अभद्र या अनुचित सवाल पूछना: यदि कोई अधिकारी जानबूझकर नागरिक से कोई अभद्र, अपमानजनक या अनुचित सवाल पूछता है, तो उसे 3 साल की सजा हो सकती है।
कर्तव्य में लापरवाही (Negligence): सौंपे गए काम को करने से इनकार करना, काम में बाधा डालना या उचित तत्परता (Reasonable Diligence) न बरतना अपराध की श्रेणी में आता है।
डेटा का गलत इस्तेमाल या गोपनीयता भंग करना: जनगणना के दौरान मिली किसी भी जानकारी को बिना सरकारी अनुमति के सार्वजनिक करना या डेटा में हेरफेर करना जेल और जुर्माने का कारण बन सकता है।
दस्तावेजों को नुकसान पहुँचाना: जनगणना से जुड़े दस्तावेजों को चुराना, छिपाना, नष्ट करना या Tabulation (सारणीकरण) को खराब करने के उद्देश्य से उनमें बदलाव करना दंडनीय है।
सिर्फ अधिकारियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी नियम कड़े हैं:
गलत जानकारी देना: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या सवालों के जवाब देने से मना करता है, तो उस पर ₹1,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
असहयोग करना: जनगणना टीम को घर में आने से रोकना या काम में बाधा डालना भी कानूनी कार्यवाही के दायरे में आता है।
जनगणना नियमों और प्रक्रिया से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए आप इन स्रोतों को देख सकते हैं:
जनगणना अधिनियम और कानूनी प्रावधान
India Code (The Census Act, 1948) पर मूल अधिनियम और धारा 11 के तहत आने वाले सभी दंडों का विवरण उपलब्ध है।
